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आपके बच्चे के मस्तिष्क के विकास के बारे में जानें।

आज की तेज दुनिया में एक बच्चे की परवरिश करना मुश्किल काम हो सकता है। बच्चों पर और माँ बाप होने के नाते आप पर कुछ अच्छा करने का दबाव हमेशा ही होता है। होड़ बचपन से ही शुरू हो जाती है, और साथ ही यह दुविधा भीहोती है की आपके बच्चे से कितनी करने की उम्मीद रखी जाए। खिलौने आपके बच्चे को होशियार बनाने के लिए काफी हैं और शिशुओं के लिए फ़्लैशकार्ड आम बात है। लेकिन क्या ये चालबाजियाँ वास्तव में काम करते हैं? एक साल सेछोटा बच्चा बुनियादी बातों के अलावा जैसे बैठने, चबाने और कभी कभार चलने और क्या सीख सकता है?

एक बच्चे के संवेदी मार्गों का विकास।

  • जन्म के समय आपका शिशु बहुत ही कम देख, सुन, और महसूस कर सकता है।
  • ये संवेदी मार्गों उत्तेजना के आधार पर बढ़ती और विकसित होती हैं।   
  • आपके शिशु के संवेदी मार्गों का विकास तब होता है जब उचित दृश्य, श्रवण और स्पर्श का उत्तेजन सही आवृत्ति, तीव्रता और अवधि में मिलता है।  
  • उदहारण के लिए, एक नवजात शिशु का प्रकाश प्रतिबिम्ब सामान्य से कम होता है। प्रकाश के संपर्क में आने पर, पुतलियों के सिकुड़ने पर प्रतिबिंव देखा जाता है। जितनी जल्दी यह प्रतिबिंब परिपक्व और एकसमान हो जाते हैं, उतनी ही जल्दी शिशु में रूपरेखा देखने और उसके बाद विस्तृत देखने की क्षमता विकसित होती है। यह आकस्मिक उत्तेजना के बजाय उपयोगी उत्तेजना है।
  • जहां तक इन सभी पांच तंत्रिक मार्गों का सवाल है (देखना, सुनना, महसूस करना, स्वाद और सुगंध की क्षमता), नवजात स्तर पर या जीवन के पहले कुछ महीनों में एक पूर्ण तंत्रिक उत्तेजना कार्यक्रम संक्षिप्त होता है।
  • ये संक्षिप्त उत्तेजनाएं हर मार्ग को परिपक्व करने में मदद करती हैं। जैसे जैसे इन मार्गों में वृद्धि होती है और ये अधिक परिपक्व होते जाते हैं, वैसे-वैसे बच्चे के लिए ये बहुत ही उपयोगी होते हैं।
  • माता-पिता सीखते हैं कि इन मार्गों का मूल्यांकन कैसे करें, ताकि वे आसानी से निर्धारित कर सकें कि उनके बच्चे को क्या चाहिए और क्या नहीं चाहिए।

आपके शिशु के मस्तिष्क का विकास

  • मस्तिष्क के विकास में गर्भधारण से लकर छः वर्ष की आयु तक ज़बरदस्त विकास होता है, लेकिन यह एक राज़ की बात है की कैसे मस्तिष्क सिर्फ उपयोग करने से विकसित होता है।
  • यदि आप अपने बच्चे को बढ़ी हुई आवृत्ति, तीव्रता और अवधि के साथ दृश्य, श्रवण और स्पर्श उत्तेजना, प्रदान करते हैं; बढ़ी हुई गतिशीलता (मोटर कौशलो की गतिविधि) और भाषा (वाणी), तो इनका सभीक्षेत्रों में अधिक तेज़ी से विकास होगा।
  • इससे उनकी दुनियादारी की समझ में वृद्धी होगी और परिवार के साथ परस्पर बातचीत में बढ़ोतरी होगी।
  • उत्तेजना और मौका देने पर आपके बच्चे के स्वास्थ्य, खुशी और  कल्याण में काफी सुधार आएगा।

जब आपके मस्तिष्क के एक क्षेत्र में विकास होता है, तो सभी क्षेत्रों में कुछ हद तक वृद्धि होती है। अगर बच्चे को ज़मीन पर चलने का मौका दिया जाए, तो उसकी गतिशीलता में सुधार होता है। जब उन्हें ज़्यादा चलने के मौके देते हैं, तोउनके श्वसन में भी सुधार आता है। जैसे ही आपके बच्चे के श्वास लेने की क्षमता बढ़ती है, वह ज़्यादा ध्वनियाँ निकालने लगता है। वे जितनी ज़्यादा ध्वनियाँ निकालेंगे, आप उतनी ही उन ध्वनियों पर प्रतिक्रियाएं करेंगे। आप अपने बच्चे से जितनाज़्यादा बातचीत करेंगे, उतना ही आप समझ पाएंगे की वह क्या कहना चाहता है, और अपने बच्चे के साथ संवाद कर सकेंगे!

मौखिक क्षमताओं का विकास

  • शोध के मुताबिक, शिशु 8 से 20 महीने के बीच अपने पहले शब्दों को स्पष्ट रूप से अभिव्यक्त करना शुरू करते हैं क्योंकि वे भाषा की ध्वनियों को अवशोषित और याद रखते हैं और उन ध्वनियों को अर्थ से जोड़ते हैं।
  • उनका मस्तिष्क इस तरह से प्रशिक्षित होता है की ज़रुरत पड़ने पर वे सभी ध्वनियाँ और सभी शब्द प्रतिरूप याद रख पाते हैं। यह लैंग्वेज इमर्शन एक्शन गेम, स्ट्रक्चर्ड गेम,विज़ुअल एड्स गेम, प्रोप और शब्दावली-समृद्ध गीत  के द्वारा हासिल किया जा सकता है। यह उन्हें सीखने और संचार करने की रूचि का आजीवन उपहार प्रदान करते हैं।
  • हालांकि उनका बडबडाना हमें विचित्र लग सकता है, लेकिन यह इस बात का संकेत होता है कि आपका लाडला बोलने लगा है। आपका बच्चा अर्थ व्यक्त करने का प्रयास करता है और अपने आस-पास स्थित बड़े लोगों द्वारा जो बोला जाता है उसे दोहराने  की कोशिश करता है।

भाषा उत्तेजना - क्या करें और क्या नहीं

करें -

  • हमेशा बच्चे की बातों को गौर से सुनें।
  • अपने बच्चे को इस तरह देखें जैसे आप उसे सुन रहे हों।
  • सब्र से उनकी प्रतिक्रिया का इंतजार करें।
  • इस बात को स्वीकार करें कि वे निर्णय लेंगे कि प्रतिक्रिया करनी है या नहीं; यह आपके बच्चे की पसंद पर निर्भर करता है।
  • जब वे बात करने का प्रयास करें, तो उनके द्वारा किए गए प्रत्येक प्रयास के प्रति उत्साह दिखाएं।
  • जो विशिष्ट ध्वनियां वे बार-बार निकालते हैं, उनका अर्थ निकालें।
  • अपने शिशु से बात करते समय सही शब्दों का उपयोग करें।

करें 

  • शिशु के साथ 'बेबी टॉक' करना।
  • उन पर ध्यान न देना।
  • प्रश्न पूछकर उन्हें जवाब देने के लिए समय न देना।
  • उनके प्रश्नों को अनसुना करना।
  • उनकी आवाज़ों की नक़ल करना और उनका मज़ाक उड़ाना।
  • उनके उच्चारण को सुधारना।
  • अपने बच्चे को उत्तर देने या प्रतिक्रिया करने पर मजबूर करना।


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