अपने बच्‍चों को बातचीत में मदद करने के कुछ गुर

Join Huggies now to receive week by week pregnancy newsletters.

अपने बच्‍चों को बातचीत में मदद करने के कुछ गुर

2 min |

भिन् आयु में बच्चे बात करना सीखते हैं। कुछ बच्चे एक वर्ष की आयु से पहले ही अपना प्रथम अर्थपूर्ण शब् उच्चार लेते हैं जबकि कुछ 2 वर्ष से पहले नहीं बोल पाते हैं।  सामान्यतया ज्यादातर बच्चे 18 महीने के होने तक बात करना प्रारंभ कर देते हैं  लेकिन बातचीत की प्रक्रिया में शामिल होना, सुनना, सोचना, समझना, बोलने की चाहत शामिल हैं। इसमें मोड़ने, साथ ही बोलने की सभी मांसपेशियों के बीच समन्वय भी शामिल होता है। बच्चों को जिस तरह चलने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है ठीक उसी तरह बोलने के लिए भी जरूर प्रेरित किया जाना चाहिए। याद रखें कि शिशु खुद शब्‍दों को इस्‍तेमाल करने के योग्‍य होने से बहुत पहले ही कहे गये शब्‍दों को भी समझते हैं।

नीचे कुछ ऐसी युक्तियां हैं जो आपके बच्चे को बातचीत शुरू करने में मदद करती हैं। 

  • जब आप साथ खेल रहे हों तो उनसे बातचीत करें।
  •  नर्सरी के राइम और गीतों  खासकर जिसमें एक्शन हों, उसके साथ मनोरंजक गतिविधि करें। 
  • उसे विभिन्‍न प्रकार की ध्‍वनियों (जैसे कि पशुओं, हवाई जहाजों, दरवाजा की घंटी का बजना) को सुनने के लिए प्रोत्‍साहित करें।
  • जब आप उनसे बात करें तो उसका ध्यान अपनी ओर आकर्षित करें। उसे आप की ओर या जिस वस्‍तु की आप बात कर रहे हों उसकी ओर देखने के लिए प्रोत्‍साहित करें।
  • हाव-भाव और तस्वीरों का उपयोग करें। 
  • उसे विकल् दें। उदाहरण के लिए, तुम्हें नारंगी चाहिए या केला चाहिए?
  • चीजों के बारे में बात करें जैसे वे घटित हैं। उदाहरण के लिए, जब उसके कपड़े बदल रहे हों, टेलीविजन देखे रहे हों, बाजार से लाए सामान को बाहर निकाल रहे हों।
  • ध्‍यान से सुनें और जो भी कह रहा है उसे खत्म करने के लिए अपने बच्चे को समय दें।।
  • अगर वह कुछ कह रहा है, तो कुछ और शब्‍दों का इस्‍तेमाल करने में उसकी मदद करें।  उदाहरण के लिए, जब वे 'गेंद' कहे तो आप इसमें कुछ शब् जोड़कर कह सकते हैं , 'हां, यह गेंद है और हम इससे खेल सकते हैं।'
  • अगर वह गलत तरीके से कुछकहें तो उसे सही तरीके से कहें।  हालांकि उसे शब् (शब्दों) को दोहराने के लिए बाध् नहीं करें।
  • उसके साथ हर दिन कुछ खास समय निकालकर खिलौने के साथ खेलने और चित्र पुस्तकों को एक साथ पढ़ें ।
  • ज्यादा और जल् की कोई अपेक्षा नहीं रखें। समय आपके बच्चों में बेहतरी लाएगा।
  • अगर आपका बच्चा आपके दोस् के बच्चे की ही तरह नहीं है तो इसे लेकर चिंता नहीं करें। बातचीत करने में समय लगता है, इसलिए शिशु के साथ जल्‍दबाजी नहीं करें।