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बच्चों के लिए व्यावसायिक आहार

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आज की दुनिया जो स्वास्थ्य और स्वच्छता के बारे में बहुत सचेत है,  उसमें आपके शिशु के लिए भी पोषक व्यावसायिक खाद्य उत्पादों को प्राप्त करना आसान हैं। फिर भी, व्यावसायिक रूप से तैयार शिशुओं के खाद्य पदार्थों का चुनाव हमें सजकता से करना चाहिए। सुनिश्चित करें कि आप उनका उपयोग कभी-कभी ही करेंगे और ध्यान रखें की उचित उपयोग का समय तो नहीं निकला गया, उनमें गुणवत्ता वाली सामग्री हो, एडिटिव्स या संरक्षक कम मात्रा में या बिल्कुल न हो और नमक या चीनी (फलों के रस को छोड़कर)नहीं होनी चाहिए।

हालांकि, आप शिशुओं के व्यावसायिक आहार को अपने शिशु के आहार का प्राथमिक अंश नहीं बनाना चाहेंगे। ऐसे उत्पाद जब आप यात्रा कर रहे हो या सामान्य से अधिक काम कर रहे हो, जैसी परिस्थितियों के लिए बेहद सहायक और सुरक्षित हैं, लेकिन पूरी तरह से सिर्फ यही देने पर, यह कुछ समस्याएं पैदा कर सकते है, जैसे कि:

  1. स्वाद, बनावट और पोषक तत्वों की विविधता में कमी: वे शिशु जो घर का बना खाना खाते है, उन्हें स्वाद, बनावट और पोषक तत्वों की विविधता प्राप्त होती हैं। घर का बना आहार आपके शिशु के लिए बनावट और स्वाद का एक बड़ा अंश प्रदान करता हैं।
  2. छुपे हुए मिठास से परिचय: फलों के रस या मलाई वाले दूध अक्सर उत्पाद को मीठा करने के लिए प्रयोग में लाये जाते हैं (यहां तक कि 'कोई अतिरिक्त शर्करा नहीं' लगे हुए लेबल वाले उत्पादों में भी)। यही कारण है कि, कुछ शिशु व्यावसायिक रूप से तैयार शिशुओं के खाद्य पदार्थों के लिए गहन पसंद बना लेते हैं। इसके अलावा घर के बने खाने में, चुपके से डाली हुई शर्करा या कोई भी संरक्षक नहीं होंगे! आप अपने शिशु को जो खिलाते है उसपर पूरा नियंत्रण रख सकते हैं। 
  3. नर्म और मुलायम बनावट की प्राथमिकता: स्पष्ट सुरक्षा कारणों से, व्यावसायिक शिशुओं के खाद्य पदार्थों के निर्माता आमतौर पर ऐसे खाद्य पदार्थों का उत्पादन करते हैं जो घर के बनाए भोजन की तुलना में बनावट में नरम और मुलायम होते हैं। लंबे समय तक नरम आहार पर ज्यादा निर्भरता आहार की बढ़त को मंद कर सकते हैं। आदर्श रूप से, गांठ वाले आहार को लगभग सात महीनो में दिया जाना चाहिए, और लगभग नौ महीनो में हाथो से खाने वाले आहार| गांठ वाले आहार सामान्य  शिशु विकास  (वाक सहित), विकास और दांतो के लिए सबसे अच्छे होते हैं। साथ ही, बाद में होनेवाले आहार के प्रति उलझन को भी खत्म करने में गठीले आहार आवश्यक होते हैं। घर पर आहार बनाकर इसे हासिल किया जा सकता हैं।
  4. मात्रा को लेकर भ्रम:  मात्रा भ्रमित करनेवाली हो सकती है, भले ही बरनी पर लिखा हो कि यह सभी बच्चों के लिए आदर्श भोजन हैं।लेकिनहर शिशु का क्षमता  भिन्न होता हैं। आप सोच  में पड़ सकते है  कि दर्शायी मात्रा आपके शिशु के लिए उपयुक्त हैं।
  5. वयस्कों के पसंद के आधार की प्राथमिकता: कभी-कभी हमारे खाने के पैटर्न को दर्शाने वाले 'रात्रिभोज' या 'मिठाई' जैसे शब्दों के साथ, बच्चों के खाद्य पदार्थों के विज्ञापन हमारा ध्यान आकर्षित करने के लिए बनाए जाते हैं। शिशुओं को खिलाने का आदर्श तरीका है कि, जितना हो सके विभिन्न प्रकार के आहार खिलाये ताकि वो अपनी पसंद बाद में बनाए!

आखिर अंत में, आपके शिशु को उनका अधिकांश पोषक तत्व पारंपरिक, घर के बने आहार से मिलना चाहिए। आप इन आहारों की गुणवत्ता पर पूरी नियंत्रण कर सकते हैं, और आप 100% सुनिश्चित रहा सकते हैं कि आपका शिशु वास्तव में क्या खा रहा हैं। यह आपके शिशु को खिलाने का सबसे सुरक्षित और स्वस्थ तरीका हैं।व्यावसायिक खाद्य पदार्थ यात्रा के दौरान और आपात स्थिति में रखने के लिए सुरक्षित हैं।


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