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वे सारी बातें जो प्रसव के बाद घर लौटने पर आपको जाननी चाहिए

अपने साथी से बात करना और इस बारे में चर्चा करना कि शिशु के घर आने के बाद आप दोनों की क्या अपेक्षाएं हैं, आपके द्वारा अनुभव किए जाने वाले तनावों को कम करने में मदद करेंगी।

हो सकता है आपको लगे कि आप अपने जीवनसाथी की भूमिका को लेकर जैसा सोचती हैं उनके विचार इससे अलग हो वह खुद को कमाकर लाने वाला और घर के कामकाज से कोई मतलब रखने वाले व्यक्ति के रूप में देख सकते हैं, हालांकि पिता होने का यह रिया काफी पुराना हो चुका है।

ज्यादातर पुरुष आज अपने बच्चे के लालन-पालन में  “व्यावहारिक” रुझान के साथ सहयोग करना पसंद करते हैं। अपने जीवनसाथी को उतना करने दें जितना वह करना चाहते है इससे आपका भार हल्का होगा और आपको बिल्कुल भी दुखी होने की कोई आवश्यकता नहीं है

यदि आप दोनों तार्किक रहते हुए अपनी अपेक्षाएं निर्धारित कर सकें और इससे पहले कि आप नींद की कमी के प्रभाव से पीड़ित होने लगें, यह एक बहुत ही सामंजस्यपूर्ण संबंध की ओर ले जाएगा। कुछ विचार कागज़ पर लिखना भी एक कारगर उपाय हो सकता है। शुभकामनाएं!

बहन या भाई को तैयार करना

  • एक छोटे बच्चे की दुनिया में एक नए बच्चे को शामिल करना उनके लिए बहुत ही असहज हो सकता है।अपने बच्चे के लिए आप सबसे अच्छा निर्णय कर सकती हैं इसलिए अपनी सहज बुद्धि का सहारा लें और उन्हें उस बारे में बताएं जो आपके विचार से उन्हें जानना चाहिए। आप क्या कर सकती हैं इसमें मदद के लिए यहां कुछ बातें बताई गई हैं
  • ज्यादातर महिलाएं अपने बच्चों को भावी नए शिशु के बारे में 13वें सप्ताह तक नहीं बताती हैं। यह आम तौर पर गर्भावस्था के “खतरे के समय” के बीत जाने का समय होता है और इससे आपके बच्चे की प्रतीक्षा अवधि कम हो जाती है।याद रखें उनके पास समय की वास्तविक अवधारणा नहीं होती और आप जैसे ही उन्हें बताएंगी, वे चाहेंगे कि नया शिशु तुरंत ही बाहर जा या अंदर ही रहे।
  • अपने नए शिशु के बारे में जितना हो सके उन्हें अपनी बातचीत में शामिल करने की कोशिश करें। एक बात मन में साफ कर लें कि “भाई चाहिए या बहन?” वाली बात उनसे कभी न करें क्योंकि इस मामले में चुनने का विकल्प उनके पास तो कतई नहीं होता, और न ही उनसे यह पूछें कि “नए बच्चे को हम क्या नाम दें?”, जब तक कि उनके पास सच में नाम चुनने को लेकर कोई इनपुट हो।
  • ऐसी परिस्थिति बनाने की कोशिश करें जहां वे निर्णय में शामिल किया जा सके, जैसे कि कपड़ों की खरीददारी, नर्सरी की तैयारी और फर्नीचर को व्यवस्थित करना। अपने बच्चे को अपने नए भाई या बहन के लिए उपहार लेने दें जिसे वह अस्पताल में आपसे मिलने के लिए अपने साथ  ला सकते हैं।
  • ज्यादातर बच्चे ईमानदारी से प्रतिक्रिया देते हैं और उन्हें यह जानकर अच्छा लगता है कि आपके अस्पताल में रहने पर उनके साथ कैसी परिस्थिति बनेगी। क्या आपके कोई परिजन आपके घर पर रहेंगे या आपके बच्चे को किसी दोस्तों के घर रहना होगा?
  • हालांकि गर्भवती होने के कारण आप बहुत थकान महसूस करेंगी लेकिन इसे इस बात के कारण के रूप में बताएं कि आप इस वजह से अपने बच्चे के लिए कुछ नहीं कर पा रहीं। वे इस बात को पकड़ कर बैठ जाएंगे और इससे उनके मन में आपके शिशु के जन्म से भी पहले उसके प्रति गुस्सा भर जाएगा।
  • शिशु की ओर से अपने बच्चे के लिए उपहार खरीदकर उसे तब देना जब वे पहली बार आपसे मिलने अस्पताल में आएं, नए शिशु से उनका परिचय करवाने का बढ़िया तरीका है।
  • नए शिशु को घर लाना आपके बच्चे के लिए बहुत ही असजहकारी हो सकता है, इसलिए उनके व्यवहार में आने वाले परिवर्तनों को लेकर पहले से तैयार रहें क्योंकि वे अब नए विस्तारित परिवार में अपनी जगह बनाने के लिए संघर्ष करते है