16 हफ्ते का गर्भ है-क्या उम्मीद की जाए?

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16 हफ्ते का गर्भ है?

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यह अभी भी आपकी गर्भावस्था में एक आरंभिक अवस्था है, पर अबसे आपका पूरा ध्यान आपके शिशु पर होता है।  पर आपको खुद का ध्यान रखने की भी ज़रूरत होती है, इसलिए यदि आपने विशेष प्रकार के ब्लड टेस्ट न करवाएं हों, तो अपने प्रसूति रोग विशेषज्ञ से मिलें, क्योंकि यह आपके और शिशु के स्वास्थ्य के लिए ज़रूरी होता है।  

इस हफ्ते आपके शरीर में होने वाले बदलाव

 

इस हफ्ते यह स्पष्ट हो जाता है कि आप गर्भवती हैं, क्योंकि 'फंडस’ (गर्भाशय का सबसे ऊपरी हिस्सा) आपकी प्यूबिक हड्डी से लगभग 16cm का होता है। 

मसूड़ों की सूजन या जिंजिवाइटिस समय-पूर्व होने वाले प्रसव का एक कारण होता है, इसलिए मौखिक स्वच्छता को बनाए रखना बहुत ज़रूरी है।पर चिंता न करें! मुलायम टूथब्रश का इस्तेमाल करें और उसे समय-समय पर बदलती रहें।साथ ही, दिन में दो बार ब्रश करें, हर दिन फ्लॉस करें और इस बात का ध्यान रखें कि आप अपनी जीभ के पीछे भी ब्रश करें, जहाँ सड़न पैदा करने वाले बैक्टीरिया पैदा होते हैं। गर्भावस्था के दौरान कम से कम एक डेंटल चेक-अप ज़रूरी होता है।

यदि आप कब्ज और धीमे मल निकास जैसी समस्याओं से जूझ रही हैं, तो खूब सारा पानी पीने, पर्याप्त मात्रा में रेशेदार भोजन, फल, सब्जियाँ, दानेदार अनाज का सेवन करने और कुछ व्यायाम करने से, आपको इनसे निजात मिल सकती है।

वेजाइनल डिस्चार्ज में वृद्धि होना आम बात है, पर जबतक कि यह खुजलीदार और बदबूदार न हो, यह एक संक्रमण नहीं है। आपकी योनि में म्यूकस स्राव करने वाली कोशिकाएँ संक्रमण से रक्षा करती हैं। 

क्योंकि आपके गर्भाशय का आकार बढ़ रहा होता है, आपके पेट के किनारों पर मौजूद पेशियाँ और लिगामेंट फैल जाते हैं और तन जाते हैं जिसके कारण आपको दर्द होता है। अचानक और झटके से कोई गतिविधि न करें और अधिक लंबे समय के लिए खड़ी न रहें। 

इस हफ्ते आपके शिशु में होने वाले बदलाव

इस हफ्ते की हैरानी वाली बात यह है कि शिशु की आंखों का नियंत्रण करने वाली पेशियाँ काम करने लगती हैं और इसलिए आपका शिशु अपनी आंखों को अगल-बगल हिला सकता है। शिशु, पेट की दीवार के माध्यम से आने वाली तेज़ रोशनी पर प्रतिक्रिया देता है, हालांकि आंखों पर अब भी इसकी पलकें बंद होती हैं।  

प्रायः इस हफ्ते तक, आपके शिशु ने नाभि-नाल का पता लगा लिया होता है और इसे पकड़ कर रखना शुरु कर दिया होता है। पर चिंता न करें, क्योंकि इससे शिशु को रक्त प्रवाह में बाधा नहीं आएगी। 

शिशु ऐम्नियोटिक द्रव के कप में पूरी तरह से मुलायम आवरण से घिरा होता है और सुरक्षित रहता है।

इस हफ्ते के सुझाव

 

यदि आप शिशु पैदा करने वाली उस श्रेणी में हैं जिनमें क्रोमोसोमल (गुणसूत्री) समस्याएँ हैं, तो या तो CVS (सीवीएस)- (कोरियोनिक विलस सैम्पलिंग) टेस्ट करवाना या ऐम्नियोसेंटेसिस करवाना ज़रूरी होगा। CVS (सीवीएस) गर्भावस्था के 12वें हफ्ते से पहले या उसके बाद करवाया जा सकता है।ऐम्नियोसेंटेसिस प्रायः गर्भ के 14-16 हफ्तों के बीच करवाया जाता है, पर फिर से गर्भ के बाद की अवस्था में भी किया जा सकता है। ये दोनों ही टेस्ट यह जांचने के लिए होते हैं कि गर्भाशय के अंदर प्लेसेंटा या गर्भनाल और शिशु कहाँ स्थित हैं।

क्या आपने गौर किया कि आपके चकत्ते और मस्से अधिक गहरे रंग के हो गए हैं? यह दरअसल आपकी त्वचा पर काला करने वाले पिग्मेंटेशन (मेलाटोनिन) के कारण होता है। उन्हें अधिक काला होने से रोकने के लिए आप रोजाना सन ब्लॉक्स का इस्तेमाल करें और उसे आप दिन में कई बार लगाती रहें।ऐसे सन ब्लॉक चुनें, जो आपको UVA (यूवीए) (बुढ़ापा पैदा करने वाली किरणें) और UVB (यूवीबी) (जलन पैदा करने वाली किरणें) दोनों से बचाए।

इस अवस्था में यह थोड़ा जल्दी लग सकता है, पर संभवतः कुछ व्यवाहारिक फ़ैसले लेना शुरु करने का यह सही समय है, जैसे कि आपकी मैटरनिटी छुट्टी, आपके घर में नर्सरी कहाँ होगी इसकी योजना बनाना इत्यादि।

भले ही आपका शिशु इस हफ्ते रोशनी 'देख’ सकता है, पर 20वें हफ्ते तक उसके पीपर पूरी तरह से नहीं बने होते हैं और आंखें पहली बार 26 और 28 हफ्तों के बीच ही खुलती हैं।